स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जीवनी Biography Of Pandit Jawahar Lal Neharu

पंडित जवाहरलाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्हें आजादी के लिए लड़ने और संघर्ष करने वाले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम किए महापुरुषों के रूप में जाना जाता है. पंडित नेहरू हमेशा से ही अपने भाषणों से लोगों के दिलों को जीत लेते थे यही कारण था कि वह आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने.
पंडित जवाहरलाल नेहरु का पूरा नाम जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू था जो उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद जिले में 14 नवंबर 1889 को मोतीलाल नेहरु के घर पैदा हुए. प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पंडित नेहरू 1910 में कैंब्रिज विश्वविद्यालय से ट्रिनिटी कॉलेज से उपाधि संपादक के शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1912 में लंदन से बैरिस्टर की उपाधि ली.

पंडित नेहरु हमेशा से महात्मा गांधी के सहायक रहे और भारत को स्वतंत्र कराने में अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया.
पंडित नेहरू को आधुनिक भारत का रचयिता माना जाता था जिन्हें बाद में चाचा नेहरू के नाम से लोग जानने लगे.

लंदन से लौटने के बाद पंडित नेहरू सबसे कम उम्र में भारतीय राजनीति में सक्रिय हो गए सन 1920 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और पार्टी ने उन्हें एक विश्वसनीय सलाहकार माना.
 तत्पश्चात पंडित जवाहरलाल नेहरु ने अंग्रेजी हुकूमत से छुटकारा पाने की घोषणा की और भारत को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की मांग की.
 सन 1930 की बात है पंडित नेहरू और कांग्रेस पार्टी ने भारतीय स्वतंत्रता अभियान का एक मोर्चा संभाला ताकि देश को अंग्रेजो के चुंगल से मुक्त कराया जा सके.

कांग्रेस से अलग होकर मोहम्मद अली जिन्ना ने मुस्लिम लीग की स्थापना की जो पूरी तरह से विफल रही तथा मुस्लिमों की हालात को देखते हुए मोहम्मद अली जिन्ना ने पुणे मुस्लिम लीग का वर्चस्व स्थापित किया लेकिन नेहरू और जिन्ना जानते थे कैसे एक दूसरे की ताकत को बांटा जा सकता है.

सन 1928 और 1929 में पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के वार्षिक सत्र का आयोजन किया गया था लेकिन इस आयोजन से पहले ही कांग्रेसमें दो घुट बन गए थे एक गुट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जो पूर्णता की मांग कर रहे थे और दूसरे गुट में स्वयं नेहरू जी थे।

दिसंबर 1929 में नेहरू जी के नेतृत्व में लाहौर में कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया और इस आयोजन में सभी ने एकमत होकर पूर्ण स्वराज की मांग का प्रस्ताव पारित किया।

26 जनवरी 1930 को लाहौर में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत का ध्वज लहराया।

जब ब्रिटिश हुकूमत ने सन 1935 में भारत अधिनियम का प्रस्ताव पारित किया था उसी समय कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का फैसला किया और कांग्रेस ने हर प्रदेश में सरकार बनाई और सबसे अधिक जगह पर जीत हासिल की जिसके बाद नेहरू जी को कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

सन 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया गया था उसी समय अंग्रेजी हुकूमत ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को गिरफ्तार कर लिया है इसके बाद उन्हें 1945 में जेल से रिहा किया।

व्हिस्की विभाजन के बाद जब कांग्रेसमें प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए चुनाव किया गया उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल एवं कृपलानी जी को सबसे अधिक वोट मिले लेकिन महात्मा गांधी जी के अनुरोध पर पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारत का प्रथम प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया।

अपनी अच्छी छवि कार्य एवं वक्तव्य के दम पर पंडित जवाहरलाल नेहरू तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने उन्होंने देश को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेकों प्राप्त किए तथा आधुनिक भारत के सपने की एक मजबूत नींव रखी।

इतनी मेहनत के बाद भी पंडित जवाहरलाल नेहरू चीन और पाकिस्तान से मित्रता पूर्ण संबंध नहीं स्थापित कर पाए वे हमेशा पाकिस्तान और चीन के साथ रिश्ते सुधारने के लिए प्रयास करते रहे लेकिन जब सन 1962 में चीन ने भारत पर हमला कर दिया नेहरू जी को अधिक पीड़ा हुई।

27 मई 1964 दिल का दौरा पड़ने के कारण भारत मां का यह लाल हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गया उनकी मौत देश के लिए एक बड़ी क्षति थी इतिहास हमेशा उन्हें याद रखेगा।

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