अगर मैं शादी करूंगा तो मौत मेरी दुल्हन होगी आजादी के महानायक शहीद भगत सिंह Biography of Shaheed Bhagat Singh

शहीद भगत सिंह का परिवार पहले से ही स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया था. भगत सिंह का जन्म 27 सितंबर 1970 पंजाब में हुआ. शहीद भगत सिंह का जब जन्म हुआ उस समय उनके पिता श्री किशन सिंह जेल में थे भगत सिंह के परिवार के हर एक सदस्य में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी क्योंकि भगत सिंह के चाचा श्री अजीत सिंह देश के एक बहुत बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे जिन्होंने बाद में एक भारतीय देशभक्ति एसोसिएशन बनाई. भगत सिंह का दाखिला दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल में उनके पिता किशन सिंह ने कराई उसी समय भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह को अंग्रेजों से बचने के लिए ईरान जाना पड़ा क्योंकि अजीत सिंह के खिलाफ 22 मुकदमे दर्ज थे.

1919 में जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ उससे भगत सिंह बहुत ही दुखी हुए तत्पश्चात इन्होंने महात्मा गांधी द्वारा एक आंदोलन चलाया जा रहा था जिसका नाम था असहयोग आंदोलन में भगत सिंह ने महात्मा गांधी का खुलकर समर्थन किया और अंग्रेजो को ललकार करके ब्रिटिश किताबों को जला दी. लेकिन जब चोरी चोरा में हिंसात्मक गतिविधि हुई इसकी वजह से महात्मा गांधी ने अपने असहयोग आंदोलन को बंद कर दिया महात्मा गांधी के इस फैसले से कोई खुश नहीं था भगत सिंह भी उनमें से थे.
क्योंकि महात्मा गांधी का अहिंसावादी रवैया किसी को हजम नहीं हो रहा था इसीलिए भगत सिंह ने महात्मा गांधी का साथ छोड़ कर दूसरी पार्टी ज्वाइन करने की सोची उसी समय भगत सिंह की मुलाकात सुखदेव भगवतीचरण और कुछ लोगों से हुई उस समय भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज से b.a. की पढ़ाई कर रहे थे लेकिन भगत सिंह में देश भक्ति उफान पर थी और फिर भगत सिंह ने अपनी पढ़ाई छोड़कर देश की आजादी में कूद गए.

उसी समय भगत सिंह पर परिवार का बड़ा दबाव था उनके घरवाले भगत सिंह की शादी करा देना चाहते थे लेकिन भगत सिंह ने शादी करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि देश की आजादी से पहले मैं शादी नहीं करूंगा और अगर “आजादी से पहले मैं शादी करूंगा तो मेरी दुल्हन होगी मौत”.
इसके बाद भगत सिंह ने नौजवान भारत सभा ज्वाइन कर ली लेकिन जब भगत सिंह के घर वालों ने उन्हें विश्वास दिला दिया कि वह भगत सिंह की शादी के बारे में नहीं सोचेंगे तब वह अपने घर लाहौर लौट गए जहां पर उन्होंने कीर्ति किसान पार्टी के लोगों से मेलजोल बढ़ाया और कीर्ति मैगजीन के लिए कार्य करने लगे जिससे कि वह अपना संदेश देश के नौजवानों तक पहुंचाते थे. सन 1926 में भगत सिंह को नौजवान भारत सभा का सिकरेटरी बना दिया गया फिर 1928 में भगत सिंह ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ज्वाइन की जिस पार्टी को चंद्रशेखर आजाद ने बनाया था.
30 अक्टूबर 1928 को साइमन कमीशन भारत आया जिसका विरोध भगत सिंह ने पूरी पार्टी के साथ मिलकर किया इस विरोध में भगत सिंह के साथ लाला लाजपत राय भी थे इन्होंने नारा लगाया कि “साइमन वापस जाओ” ठीक इसी समय पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया और इस लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय बुरी तरह से घायल हो गए कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई.
लाला जी की मृत्यु ने भगत सिंह को अंदर से झकझोर कर रख दिया और भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की मृत्यु की बदला लेने की ठानी.
भगत सिंह इस घटना के जिम्मेदार ऑफिसर स्टार्ट को मारने का प्लान बना रहे थे लेकिन उन्होंने गलती से असिस्टेंट पुलिस को मार दिया तथा वहां से भगत सिंह तुरंत लाहौर की तरफ भाग निकले, लेकिन ब्रिटिश सरकार भी उस समय हाथों में हाथ धरे नहीं बैठी थी उन्होंने भगत सिंह को ढूंढने के लिए चारों तरफ जाल बिछा दिया था लेकिन फिर भी वह भगत सिंह को ढूंढने में असमर्थ थे उस समय भगत सिंह ने अपनी दाढ़ी को कटवा दिया था जोकि सिक्खों के सामाजिक धार्मिकता के खिलाफ है.

भगत सिंह चाहते थे कि एक बड़ा धमाका हो जिससे बहरे अंग्रेजों को सुनाई देने लगे इसमें उनका साथ दिया चंद्रशेखर आजाद राजदेव और सुखदेव ने. दिसंबर 1929 में भगत सिंह अपने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार की असेंबली हाल में बम ब्लास्ट किया यह बम ब्लास्ट सिर्फ आवाज करने वाला था जिसे एक ऐसी जगह पर फेंका गया जो खाली पड़ा था इस ब्लास्ट के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए और लोगों को पर्ची बांटते हुए अपनी गिरफ्तारी दे दी.

भगत सिंह राजगुरु सुखदेव तीनों के खिलाफ मुकदमा चला जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई इस दौरान भगत सिंह राजगुरु सुखदेव इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते रहे भगत सिंह को जेल में बहुत ही ज्यादा प्रताड़ित किया गया.
उस समय भारतीयों के साथ जेल में भी बहुत ही बुरा व्यवहार किया जाता था ना अच्छा कपड़ा मिलता था मैं खाना मिलता था नाही पीने के लिए पानी दिया जाता था.
भगत सिंह ने जेल के अंदर एक आंदोलन शुरु कर दिया और कई दिनों तक अन्न जल का त्याग किया उस दौरान भी अंग्रेजी पुलिस उन्हें यातनाएं देने से बाज नहीं आती थी.

सन 1930 में जेल से ही भगत सिंह ने एक किताब लिखी जिसका नाम था “Why I Am Atheist”.
भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी की सजा मुकर्रर की गई थी लेकिन पूरे देश में भगत सिंह राजगुरु सुखदेव की रिहाई के लिए प्रदर्शन हो रहे थे इस प्रदर्शन ने ब्रिटिश सरकार को झकझोर दिया ब्रिटिश सरकार इस आंदोलन के आगे इस प्रदर्शन के आगे पूरी तरह मस्त हो गई डर गई और भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को 1 दिन पहले 23 मार्च 1931 को फांसी की सजा दे दी.

Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!