मौलाना अबुल कलाम आजाद की जीवनी और उनके संघर्ष Biography of Maulana Abul Kalam Azad

मौलाना अबुल कलाम आजाद का पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मोहिउद्दीन है लेकिन लोग इन्हें मौलाना आजाद के नाम से जानते थे.
मौलाना अबुल कलाम आजाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य तथा भारत को स्वतंत्र कराने की खातिर अपना सर्वस्व निछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी थे.
मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अनेकों आंदोलनों में हिस्सा लिया इसके साथ ही वह एक महान वैज्ञानिक कवि और राजनेता भी थे.
देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के लिए इन्होंने अपने पेशेवर काम को भी छोड़ दिया और देश की आजादी के लिए काम कर रहे लोगों के साथ काम करने लगे और आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया.
मौलाना अबुल कलाम आजाद देश की विभाजन के कट्टर प्रतिद्वंदी थे तथा इन्होंने धार्मिक सद्भाव के लिए काम किया.

मोहम्मद अली जिन्ना से अलग मौलाना अबुल कलाम आजाद देश की स्वतंत्रता को संप्रदायिक स्वतंत्रता से बढ़कर मानते थे.

कई सालों तक उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी और भारत-पाकिस्तान बंटवारे के हम गवाह बने लेकिन मौलाना अबुल कलाम आजाद एक सच्चे भारतीय थे और आजादी के बाद भारत में रहकर ही विकास कार्य करने लगे तथा देश की शिक्षा पद्धति सुधारने के लिए इन्हें देश का पहला शिक्षा मंत्री बना दिया गया.

मौलाना अबुल कलाम का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का सऊदी अरब में हुआ था इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरूद्दीन था.
मौलाना अबुल कलाम के पिता एक बहुत बड़े विद्वान थे तथा वह बंगाली मौलाना थे उनकी माता अरब की थी.
1857 में जब विद्रोह हुआ तो उन्हें भारत छोड़कर भारत जाना पड़ा तथा अरब में ही मौलाना आजाद का जन्म हुआ लेकिन कुछ दिनों बाद सन 1890 में मौलाना अबुल कलाम का परिवार भारत आकर कोलकाता में बस गया.

मौलाना अबुल कलाम महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन से बहुत प्रभावित थे तथा वे महात्मा गांधी के अनुयाई बन गए और गांधी जी के बताए गए रास्ते पर चलने लगे.

मौलाना अबुल कलाम भी महात्मा गांधी की तरह स्वदेशी वस्तुओं का ही उपयोग करते थे तथा लोगों को स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की सलाह दी देते थे.

जब मौलाना अबुल कलाम मध्य प्रदेश साल के थे तभी सन 1923 में उन्हें सबसे कम उम्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया.

सन 1942 में मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में मुंबई में एक ऐतिहासिक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था और उस अधिवेशन में मौलाना आजाद ने छोड़ो भारत का प्रस्ताव पारित किया.

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ भाषण करने के कारण मौलाना अबुल कलाम आजाद को 2 वर्ष की जेल की सजा हुई थी.

आजादी के बाद जब 1947 में सरकार का गठन किया गया तो उसमें मौलाना अबुल कलाम आजाद को शिक्षा मंत्री बनाया गया.

22 फरवरी 1958 को मौलाना अबुल कलाम इस दुनिया को छोड़ कर चले गए.

सन 1992 में मौलाना अबुल कलाम को भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

मौलाना अबुल कलाम आजाद पूरी तरह से एक राष्ट्रवादी भारतीय थे और इतिहास हमेशा उन्हें याद करता रहेगा.

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