सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय और उनके संघर्ष Biography and Struggle of Sarojiani Naidu

सरोजिनी नायडू एक महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और एक महान कवित्री थी जिन्हें भारत कोकिला के नाम से जाना जाता है सरोजिनी नायडू एक पहली महिला थी जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष और आजादी के बाद राज्यपाल बनी.

सरोजिनी नायडू भारत की महान सफल महिलाओं में से एक थी वह खाली समय में कविताएं लिखा करती थी और अपनी कविताओं में एक अलग चुलबुलापन लिखा करती थी.

सरोजिनी नायडू का पूरा नाम सरोजिनी चट्टोपाध्याय है इनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था इनके पिता का नाम डॉक्टर अघोरी नाथ चटोपाध्याय तथा माता का नाम सुंदरी देवी था.
उनके पिता डॉक्टर अघोरी नाथ चट्टोपाध्याय वैज्ञानिक और डॉक्टर थे.

देश की आजादी के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दिया और लड़ाई में कूद पड़े.

सरोजिनी नायडू 8 भाई बहनों में सबसे बड़ी थी तथा उनके एक भाई वीरेंद्र नाथ एक बड़े क्रांतिकारी थे जिन्होंने सन 1935 में एक अंग्रेज को मार डाला था.

सरोजिनी नायडू को हिंदी इंग्लिश तेलुगु बंगाली उर्दू अच्छा ज्ञान था कथा 12 वर्ष की आयु में उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से मैट्रिक की परीक्षा प्राप्त किया.

सरोजिनी नायडू के पिता हमेशा से चाहते थे कि वह आगे चलकर वैज्ञानिक बने लेकिन सरोजिनी नायडू को कविता लिखने में ज्यादा रुचि थी.

सरोजिनी नायडू अक्सर अपने गणित के पुस्तक में कविताएं लिख देती थी एक बार उन्होंने 13 साल लाइन की कविता लिख दी थी जिसे देखने के बाद उनके पिता अचंभित हो गए और उन्होंने इसे हैदराबाद के नवाब को दिखाया तथा काफी बनवाकर लोगों में बाटा भी.





सरोजिनी नायडू की कविताओं को देखकर हैदराबाद के नवाब ने उन्हें विदेश में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप और लंदन के किंग कॉलेज तथा कैंब्रिज विश्वविद्यालय से पढ़ाई की. इन सबके बावजूद सरोजिनी नायडू की रुचि कविताएं लिखने में थी.
पढ़ाई के दौरान ही सरोजिनी नायडू की मुलाकात डॉक्टर गोविंद राजू नायडू से हुई पढ़ाई खत्म होने के बाद दोनों एक दूसरे के करीब आ गए और दोनों में प्रेम प्रसंग बढ़ गया था.
पढ़ाई पूरी करने के बाद 19 वर्ष की आयु में सरोजिनी नायडू है 1897 में दूसरी जाति में शादी कर ली.
तमाम विरोधों के बावजूद समाज की चिंता ना करते हुए सरोजिनी नायडू के पिता उनकी शादी के लिए मान गए.

सन 1925 में सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए खड़ी हुई और जीत हासिल करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया और कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बन गई.

जब नमक सत्याग्रह में महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया था तब सरोजिनी नायडू ने नमक सत्याग्रह में मुख्य भूमिका निभाई और महात्मा गांधी की जगह काम किया.

सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सरोजिनी नायडू की मुख्य भूमिका थी तथा उन्हें महात्मा गांधी के साथ 21 महीनों तक जेल में रहना पड़ा था.

देश की आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया और सरोजिनी नायडू भारत की प्रथम महिला राज्यपाल थी.

2 मार्च 1949 को ऑफिस में कार्य के दौरान सरोजिनी नायडू को हार्ड अटैक आया और वह इस संसार को छोड़कर हमेशा के लिए चली गई लेकिन सरोजिनी नायडू आज भी भारत की करोड़ों महिलाओं के लिए एक प्रतीक है और उनसे हमें प्रेरणा मिलती है

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