बाल गंगाधर तिलक की जीवनी और उनके संघर्ष Biography and Struggle of Bal Gangadhar Tilak

महात्मा गांधी के पहले आजादी की लड़ाई के सबसे बड़े लीडर माने जाते थे जिन्हें गांधी जी ने आधुनिक भारत का निर्माता लाला लाजपत राय जी ने भारत में जाने वाला शेर और नेहरू जी ने भारतीय क्रांति का जनक बताया था गांधीजी के विद्रोह के तरीकों में भी वही मुद्दे होते थे जो तिलक पहले उठाया करते थे वैसे स्वदेशी स्वराज्य और शिक्षा में सुधार इन्होंने जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ भी संघर्ष किया है उन्होंने कहा था कि यदि भगवान छुआछूत को मानता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूंगा अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण अंग्रेजों के लिए परेशानी बने तिलक जी को एक बार जेल भी जाना पड़ा और कई दिक्कतें झेलनी पड़ी.

गंगाधर तिलक जी का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था इनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक स्कूल टीचर और संस्कृत के विद्वान थे जब 10 साल के थे तब इनकी मां की मृत्यु हो गई और जब यह 16 साल के हुए उनके पिता की मृत्यु हो गई 1871 में इनकी शादी तभी भाई जी से हुई जिनका नाम बदलकर सत्यभामा रख दिया गया मैथमेटिक्स तिलक को बहुत पसंद था इन्होंने मैथमेटिक्स बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री ली और जिन्होंने LLB करने के लिए बीच में छोड़ दिया इसके बाद उन्होंने प्राइवेट स्कूलों के कारण स्कूल छोड़ दिया और जनानी पत्र का संपादन शुरू किया मराठी में केसरी और हिंदी में मराठा उनका मानना था कि देश की आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता की भूमिका होती है देश की शिक्षा व्यवस्था काफी चिंतित रहते थे उनका मानना था कि जो शिक्षा अंग्रेज हमें दे रहे हैं इससे अंग्रेजों को लंबे समय तक भारत पर राज करने में आसानी होगी हमारे देश को कोई फायदा नहीं होने वाला इसके लिए उन्होंने अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ मिलकर डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी का गठन किया जिसका लक्ष्य था शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना अपने अखबारों में अंग्रेजों के खिलाफ लिखते थे और आजादी के लिए लड़ने के लिए लोगों को प्रेरित करते थे जिसके कारण और 18 महीने की जेल हो गई.

इन्होंने अन्य नेताओं के साथ मिलकर स्वदेशी आंदोलन शुरु किया और अंग्रेजों का जमकर विरोध किया मगर पार्टी में कुछ लीडर्स के रवैया से यह खुश नहीं थे दोस्तों गौर करने वाली बात यह है कि कोई भी अपनी तरफ से गलत नहीं सोच रहा था एक तरफ गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नेता थे जो यह मानते थे कि अंग्रेजो के खिलाफ कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है और ऐसा करने पर सब कुछ खत्म हो सकता है इसलिए हमें आगे बढ़ना चाहिए दूसरी तरफ से जो यह मानते थे कि आजादी सिर्फ लड़का और बलिदान देकर ही मिल सकती है दुश्मन के आगे झुके बंगाल के विभाजन के बाद दोनों गुटों में तनाव बढ़ गया और कांग्रेस की मीटिंग में चुनाव को लेकर बहस हो गई और नरम दल और गरम दल अलग हो गई.
 तिलक को एक बार फिर अंग्रेजों के खिलाफ नस्लभेद को बढ़ावा देने के जुर्म में 6 साल की सजा हो गई जेल में इन्होंने  किताब लिखी और उससे मिले पैसे आजादी की लड़ाई में खर्च किए गए.
जेल से बाहर आने के बाद गांधीजी को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए भी मनाने की बहुत कोशिश की 1916 में इन्होंने होमरूल लीग की स्थापना की जिसका लक्ष्य स्वराज लोगों के समूह को इकट्ठा करने के लिए इन्होंने गणेश उत्सव की शुरुआत की धार्मिक कार्यक्रमों के बाद आजादी की लड़ाई के लिए प्रोत्साहन दिया जाता था.
उन्होंने बाल विवाह और शराब पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी सरकार पर दबाव डाला उन्होंने एक बार कहा था कि महान उपलब्धियां कभी भी आसानी से नहीं मिलती और आसानी से मिलने वाली उपलब्धियां कभी महान नहीं होती 1 अगस्त 1920 को इनका निधन हो गया पूरे देश में लाखों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी जीते जी तो नहीं पर इनके प्रयासों को धीरे-धीरे सफलता मिलने लगी और आजादी के लिए आंदोलन और भी मजबूत होता गया 27 साल बाद आज मिल गया.
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