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सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी Biography of Sardar Vallabh Bhai Patel

Biography of Sardar Vallabh Bhai Patel

देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की अग्रणी नेताओं में से एक माना जाता है. लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल यह कैसा नाम है जिन्हें उस वक्त का हर एक युवा प्रधानमंत्री के रुप में देखना चाहता था लेकिन अंग्रेजों की कूटनीति और महात्मा गांधी तथा जवाहरलाल नेहरू की वजह से यह सपना साकार ना हो सका.
सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नाडियाड मुंबई में हुआ था. इनके पिता का नाम झावर भाई तथा उनकी माता का नाम लाड बाई था.
सरदार वल्लभ भाई पटेल एक साधारण परिवार में जन्मे थे उनके पिता एक किसान थे. बचपन से ही सरदार वल्लभ भाई पटेल अपनी शिक्षा इंग्लैंड जाकर पूरी करना चाहते थे. इन्होंने अपनी मैट्रिक की पढ़ाई 22 वर्ष की उम्र में पूरी की कथा दोस्तों से उधार किताबें लेकर अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की.
सरदार वल्लभ भाई पटेल इंग्लैंड जाकर 36 महीने की पढ़ाई 30 महीने में पूरी की और कॉलेज में टॉप किया तथा देश लौटकर गुजरात के अहमदाबाद में एक बैरिस्टर के रूप में कार्य करने लगे.
विदेश से लौटने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल के हाव भाव पूरी तरह बदल गए थे वह यूरोपियन स्टाइल में सूट-बूट पहनने लगे थे. इनकी इच्छा थी कि वह अधिक से अधिक पैसे कमाए और अपने बच्चों को एक सुनहरा भविष्य दे.

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Biography of Sardar Vallabh Bhai Patel

कुछ महीनों बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल गांधीजी से प्रभावित हुए और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई तथा राजनीति में सक्रिय हो गए.

विदेश से आने के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल अपने क्षेत्र में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार छुआछूत एवं अपने स्थानीय क्षेत्र में शराब के खिलाफ एक अभियान छेड़ा तथा हिंदू मुस्लिम एकता बनाए रखने की पूरी कोशिश की.
तत्पश्चात सन 1917 में गांधी जी के आदेशानुसार सरदार पटेल खेड़ा के किसानों को इकट्ठा करके अंग्रेजो के खिलाफ एक अभियान छेड़ा. उन दिनों भारत का सबसे बड़ा आय का स्रोत कृषि था लेकिन किसान हमेशा प्रकृति पर ही निर्भर था.

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Biography of Sardar Vallabh Bhai Patel

सन 1917 की बात है जब ज्यादा वर्षा के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी और अंग्रेज अफसर किसानों से कर वह सुनना चाहते थे जो कि अंग्रेजी हुकूमत को विधिवत कर देना बाकी था. ऐसे हालात में सरदार वल्लभभाई पटेल महात्मा गांधी के साथ मिलकर किसानों को एकजुट किया और उन्होंने अंग्रेजी सरकार को इस बात को मानने के लिए बाध्य किया कि किसान कर नहीं देंगे और इस तरह से यह सरदार वल्लभ भाई पटेल की पहली जीत थी लोग इसे खेड़ा आंदोलन के नाम से जानते हैं.

सन 1928 की बात है सरदार वल्लभ भाई पटेल ने साइमन कमीशन के खिलाफ बारडोली में एक सत्याग्रह का नेतृत्व किया था इस सत्याग्रह के तहत सरदार वल्लभ भाई पटेल चाहते थे कि अंग्रेजी हुकूमत ने जोकर बढ़ाया है उसे वापस लिया जाए. सत्याग्रह में मुख्य रूप से अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा बनाए गए कार्य का विरोध किया गया तथा इस सत्याग्रह का नतीजा यह हुआ कि ब्रिटिश वायसराय को झुकना पड़ा.
इस आंदोलन की सफलता के बाद लोग वल्लभ भाई पटेल को सरदार कहने लगे.

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दंतमंजन उद्योग लगाए और हर महीने ₹50000 कमाए toothpaste manufacturing business

दंत मंजन हमारे दैनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा है और हर घर में उपयोग होता है सुबह आंख खुलने के बाद सबसे पहले उपयोग में आने वाली आवश्यक उत्पाद दंत मंजन हीं है.
दंत मंजन का नाम आते ही हमारी आंखों के सामने प्रसिद्ध उत्पाद जैसे क्लोजअप कोलगेट पेप्सोडेंट लाल दंत मंजन विको वज्रदंती आदि आ जाते हैं.
दंत मंजन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं 1 पेस्ट के रूप में और दूसरा पाउडर के रूप में बाजार में उपलब्ध है.
पाउडर स्वरूप दंत मंजन क्योंकि पारंपरिक स्वरूप के पद्धति का चूर्ण होता है बनाने के लिए खर्चा कम आता है जबकि पृष्ट स्वरूप दंत मंजन बनाने के लिए खर्चा ज्यादा आता है.
आप घर से ही 50000 से ₹100000 लगाकर गृह उद्योग के रूप में दंतमंजन उद्योग को शुरू कर सकते हैं.


रा मटेरियल

रा मटेरियल के रूप में फिटकरी नमक लकड़ी का कोयला नीलगिरी का तेल हिरडा सुगंधित द्रव्य और आयुर्वेदिक गुड धर्मों के पेड़ों के छाले आदि कच्चे माल के रूप में उपयोग में लाए जाएंगे

मशीनरी

इस उद्योग को शुरू करने के लिए ग्राइंडर बड़ा मिक्सर पैकिंग करने की मशीन प्लास्टिक की टब पॉलिथीन की थैलियों स्टीकर्स बैरल  कटर्स इत्यादि उपयोग में लाए जाते हैं.

इस उद्योग को शुरू करने के लिए 2000 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होती है जिसमें 1000 स्क्वायर फीट की इमारत होनी चाहिए अगर मनुष्य बल की बात करें तो इसमें कुल आठ  मनुष्य बल की आवश्यकता होती है जिसमें दो कुशल दो अर्धकुशल तथा चार और अकुशल मनुष्य बल चाहिए होते हैं.
मशीनरी पर 350000 रुपए क्या ब्याज होता है कच्चा माल प्रति महीने ₹100000 तक का लगता है.
इस उद्योग को लगाने पर आप को बैंक से 65% लोन मिलता है तथा खुद का 35% लगाना होता है. अगर आप मासिक ₹1000 का कच्चा माल लेकर व्यवसाय करते हैं तो आप की वार्षिक बिक्री 2740000 रुपए होगी जिस में कुल वार्षिक खर्च 21 लाख रुपए होंगे इस प्रकार से इस व्यवसाय में वार्षिक 640000 रुपए का फायदा होगा.
इस व्यवसाय को आप कम लागत में भी शुरू कर सकते हैं.

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इमिटेशन ज्वेलरी उद्योग आर्टिफिशियल ज्वेलरी उद्योग Artificial Jewelry Manufacturing Business

वर्तमान समय में आधुनिकीकरण के कारण अनेकों प्रकार के मांगलिक कार्यों में महिलाएं आकर्षक दिखने के लिए नकली
गानों का उपयोग करती है इन्हें इमिटेशन ज्वेलरी या आर्टिफिशियल ज्वेलरी कहते हैं अधिकतर महिलाएं आकर्षक दिखने
के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी को खरीद लेती है सोने के गहने  खरीदने में जो लोग असमर्थ होते हैं वह भी इसका उपयोग
करते हैं क्योंकि सोने की कीमत आज आसमान छूने को आतुर है.
महिलाएं पुराने समय से ही सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करती आ रही है तथा उन्हें हर प्रकार के गहनों का शौक है.



सोने चांदी के गहने खरीद लेना संभव  ना होने से इमिटेशन ज्वेलरी या आर्टिफिशियल ज्वेलरी शादी समारोह,  त्यौहारों में
उपयोग करना वर्तमान समय में एक फैशन बन गया है.



आर्टिफिशियल ज्वेलरी से मतलब महिलाओं के हार,  कंगन, कान के झुमके, अंगूठी , पायल, ब्रेसलेट, कुंदन और
नेकलेस से है.



आर्टिफिशियल गहने में सोने और चांदी की चमक और आकर्षक  जिद्दी डिज़ाइनों के इसकी मां बहुत ही ज्यादा है इसलिए
आजकल महिलाएं सजने-संवरने के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी का उपयोग करती है.



आर्टिफिशियल ज्वेलरी की खास बात यह है कि इसका कच्चा माल काफी सस्ता मिल जाता है.  इसलिए इसकी मांग
ज्यादा ही रहती है. इस उद्योग को घर बैठे ही भी कर सकते हैं या फिर पार्ट टाइम के रुप में भी इस व्यवसाय को शुरू कर
सकते हैं. यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें नुकसान होने की संभावना नहीं होती है.






मार्केट



सौंदर्य प्रसाधनों की दुकानें, प्रदर्शनी,  ब्यूटी पार्लर तथा आदित्य स्टेशनरी की दुकानों पर आर्टिफिशियल ज्वेलरी की मांग
बहुत है.


रा मटेरियल

अनेकों प्रकार के कुंदन, मनी,   संखलियो की कड़ियां, चमकने वाले हीरे, नकली मोती, धागे तथा अनेको प्रकार की  
संखलियोकी डिजाइनें आदि कच्चे माल के रूप में लगते हैं.



मशीनरी

हैंडमोल्डिंग मशीन, चिमटे, मनी,  पिरोने की तार, सुई, छोटे पकड़, छोटी हथौड़ी, फेविकोल आदि जरूरत के हिसाब से
लगते हैं.


इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 400 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 200 स्क्वायर फीट की इमारत
होनी चाहिए इस व्यवसाय को दो मनुष्य बल के साथ आसानी से किया जा सकता है इसमें एक क्वेश्चन और एक अकुशल
मनुष्य बल की जरूरत होती है.
अगर यंत्र सामग्री की बात करें तो यंत्र सामग्री पर कुल ₹45000 का खर्च आता है तथा कच्चा माल मासिक ₹30000 तक
का लगता है अगर हम ₹30000 कच्चे माल से इस व्यवसाय को शुरू करते हैं तो वार्षिक 360000 रुपए का कच्चा माल
लगेगा जिस से बनी सामग्री की बिक्री ₹940000 में होगी कुल वार्षिक खर्चा ₹650000 का होगा.  इस प्रकार इस व्यवसाय
से आसानी से दो लाख 90 हजार रुपए वार्षिक फायदा होगा.

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फीनेल निर्माण उद्योग Phynel Manufacturing Business

आजकल के आधुनिकीकरण के दौर में औद्योगिक और घरेलू  उपयोगों में फिनेल की मांग बहुत ज्यादा है एक ऐसा केमिकल है जो हर घर में उपयोग किया जाता है घर की फर्श धोने से लेकर टाइल्स धोने तक में इसका उपयोग होता है.
फिनेल दो प्रकार के होते हैं एक काला फाइनल होता है और दूसरा सफेद फिनाइल. आजकल कोल्ड प्रोसेस या हॉट प्रोसेस ऐसी दो पद्धतियां है जिनसे फिनल तैयार किया जाता है.

मार्केट

आजकल फइनल बिक्री के लिए सरकारी कार्यालयों अस्पतालों होटल माल लॉजिंग शोरूम्स अस्पताल नगरपालिका आदि जगह पर बहुतायत मात्रा में मांग होती है. फीमेल उत्पादन का खर्च कम होने से होल सेलर्स और रिटेलर्स अच्छी मार्जिन की वजह से कुछ ज्यादा ही इसे बेचते हैं. और चैनल को एक अच्छे फार्मूले से तैयार किया जाए तो व्यवसाय में वृद्धि कोई रोक नहीं सकता.

रा मटेरियल्स

सल्फोनेटेड कस्टर ऑयल, कास्टिक सोडा, पाइन रेजिन, पी आर ओ कस्टर आयल, कार्बोलिक एसिड, पानी और डेड ओ पाइन आदि की जरूरत होती है.

मशीनरी

मिश्रण घोलने के लिए एक बारा मिक्सर, बोतलों का पैकिंग, बैरल, लेबलिंग काटने की मशीन तथा रासायनिक उपकरणों की जरूरत होती है.

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 1000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 500 स्क्वायर फीट की इमारत होनी चाहिए इस व्यवसाय को हम तीन लोगों के साथ शुरू कर सकते हैं इसमें एक कुशल तथा दो अकुशल मनुष्य बल की जरूरत लगेगी.
मशीनरी में 140000 रुपए का खर्च होगा , मासिक कच्चा माल ₹40000 का लगेगा.
सारे खर्च निकालने के बाद इस व्यवसाय से वार्षिक 340000 रुपए तक का फायदा होगा.

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आईना निर्माण उद्योग Mirror Manufacturing Business

आजकल जैसे जैसे हम आधुनिकीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं वैसे-वैसे आईने की मांग बढ़ती जा रही है घर से लेकर ऑफिस तक गाड़ियों से लेकर कंपनियों तक हर जगह उपयोग में आने वाली सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण वस्तु आईना है बाथरूम से लेकर बेडरूम तक हर जगह इसकी जरूरत होती है.
गरीबों से लेकर अमीरों तक हर एक के घर में आईना होता है आजकल के दौर में इसकी मांग बहुत ही ज्यादा है.
आजकल वाहन मोटरसाइकिल कार रिक्शा ट्रैक्टर ट्रक हर प्रकार के वाहनों में भी आईने काफी आवश्यक होते हैं.
आजकल तो अधिकतर ऑफिस और कंपनियों के दरवाजे भी आई नो से बनाए जाते हैं कहीं-कहीं जगह पर आईने की दीवारें भी लगाई जाती है.
कारपोरेट ऑफिस से लेकर बैंक के कार्यालय तक सिनेमाघरों से लेकर बड़ी बड़ी इमारतों तक हर जगह आईने को लगाने का फैशन सा आ गया है.
होटल हो या शोरूम हो क्लब हो या उपहार गृह हो या फिर कपड़े की दुकानें हो हर जगह प्रवेश द्वार आईने से ही बनाया जाता है अधिकतर जगह पर बाहरी सजावट आईने के कांच से ही की जाती है.

 रा मटेरियल्स

सेल्यूलोस एनमल कलर्स, रसायने, सिंदूर, वार्निश तथा पुत्र क्वालिटी के कांच

मशीनरी

एयर कंप्रेसर फिल्टर, कांच साफ करने की मशीन, पानी की टंकी आज की जरूरत होती है.

इस कार्य को शुरू करने के लिए 20000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 5000 स्क्वायर फीट की इमारत होनी चाहिए अगर मनुष्य वालों की बात करें तो 4 कुशल और 10 अकुशल मनुष्य बलों की आवश्यकता पड़ती है.
अगर हम यंत्र सामग्री खरीदते हैं तो इस पर ₹700000 का खर्च आएगा तथा कच्चा माल ₹200000 तथा प्रत्यक्ष खर्च ₹200000 होंगे.
इस व्यवसाय को शुरू करने पर भी आप को बैंक से 65% का कर ही मिलता है तथा आपको खुद पर 30% अपने पास से लगाना होगा
इस व्यवसाय में वार्षिक कच्चा माल 2400000 रुपए के लगेंगे, काम करने वालों की वेतन 1000000 रुपए होंगे, यातायात खर्च 270000 रुपए होंगे, कर्ज का ब्याज ₹130000 होगा.

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इलेक्ट्रिक गीजर निर्माण उद्योग Electric Geyser Manufacturing Business



पुराने समय में पानी को गर्म करने के लिए प्राकृतिक इन दोनों का उपयोग किया जाता था,  हमारा देश हमेशा से ही कृषि
प्रधान देश रहा है इसके कारण गांव देहात में लकड़ी, घास फूस,  धान के पौधों आदि का ईंधन के रूप में उपयोग करके
पानी गर्म किया जाता था.
इन का उपयोग खाना बनाने में भी किया जाता था लेकिन बाद में इन इन दिनों की जगह घासलेट जिसे (मिट्टी के तेल के नाम
से जाना जाता  है )ने ले लिया.
आधुनिकता के दौर में प्राचीन काल के तीन दिनों की जगह गैस ने ले लिया क्योंकि शहरों के घर सीमेंट से बनाए जाते  है
जहां चूल्हा जलाना संभव नहीं है.



फ्लैट और अपार्टमेंट में आधुनिक सुविधाएं होती है और यहां प्राकृतिक गैस उपयोग में लाया जाता है लेकिन गैस में  हो रही
कालाबाजारी और दामों में बेतहाशा वृद्धि की वजह से पानी गर्म करने के लिए इलेक्ट्रिक गीजर का उपयोग होने लगा.
क्योंकि यह ईंधन और गैस दोनों की अपेक्षा कम खर्चीला होता है और इलेक्ट्रिसिटी भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है.
यही कारण है कि वर्तमान समय में लोगों ने पानी गर्म करने के लिए गीजर को महत्त्व ज्यादा दिया.






मार्केट

वर्तमान समय में इलेक्ट्रिक गीजर हर घर की जरूरत है तथा सभी विद्युत उपकरण बेचने वाले होलसेल दुकानों में और
रिटर्न दुकानों में यह आसानी से मिलता है क्या अच्छी जगह है जहां पर आप उत्पादन करके पूरी कर सकते हैं.
आजकल छात्रावास,  अस्पताल, धर्मशालाएं,  होटल और लॉजिंग इन जगह पर इस की अत्यंत आवश्यकता होती है.
आप इन लोगों से मिलकर उनकी आवश्यकता के अनुसार गीजर तैयार करके दे सकते हैं.



रा मटेरियल



रा मटेरियल्स के रूप में इस व्यवसाय में  हीटर नाइक्रोम वाय, कॉपर सीट पत्रा, एम एस सीट, वायलेट कैप,  
बीएस पाइप, थर्मोस्टैट, आदि कच्चा माल के रूप में लगेगा.



मशीनरी
 इस व्यवसाय में  गैस वेल्डिंग मशीन,  स्पिनिंग लेंथ मशीन, रोलिंग मशीन,  पेंटिंग पंप आदि उपकरण लगेंगे.



इस व्यवसाय को 3000 स्क्वायर फीट जगह में शुरू कर सकते हैं इसमें 1504 में इमारत होनी चाहिए,  इस व्यवसाय में
मनुष्य बनो की आवश्यकता करीब 14 है जिसमें 4 कुशल कारीगर होने चाहिए.
गीजर व्यवसाय को शुरू करने के लिए यंत्र सामग्री पर कुल खर्च ₹600000 होंगे,  तब मासिक कच्चा माल ₹90000 तक
का लगेगा इस प्रकार कुल कच्चा माल वार्षिक 1080000 रुपए तक का लगेगा जिससे  3800000 रुपए तक की तैयार
गीजर की बिक्री होगी.
इस व्यवसाय में कच्चा माल मनुष्य बल तथा अन्य कुल खर्च 2900000 रुपए तक के होंगे,  इस प्रकार इस व्यवसाय से
वार्षिक ₹900000 तक कमा सकते हैं.

 इस व्यवसाय को शुरू करने पर आपको बैंक से 65% का कर्ज मिलेगा तथा आपको अपने पास से 35% लगाना पड़ेगा.

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अगरबत्ती उद्योग AGARBATTI MANUFACTURING BUSINESS

भारतीय संस्कृति में अगरबत्ती का अपना अलग ही महत्व है किसी भी धार्मिक कार्य में पूजा अर्चना करने के लिए धार्मिक
विधियों में अगरबत्ती धूप बत्ती की आवश्यकता होती है.
इस व्यवसाय को घर बैठे महिला पुरुष तुरंत नगद पैसा प्राप्त करके देने वाले अगरबत्ती उद्योग को शुरू कर सकते हैं
इस उद्योग का चयन करना सबसे सही है. अगर का अवतार इस उद्योग में लगाए गए धन पर निर्भर करता है,
अगरबत्ती उद्योग में प्रत्यक्ष  अगरबत्ती तैयार करना और तैयार की गई और व्यक्तियों को बाजार में बेचना  वैसे ही अगरबत्ती
व्यवसाय की सामग्री देना ऐसा भी व्यवसाय कर सकते हैं.
अगरबत्ती व्यवसाय के लिए लगने वाली सामग्री अधिकतर होलसेल व्यापारियों के पास मिलता है.  1 किलो टूटने से सामान्यता
15000 कांडी तैयार कर सकते हैं.
इसमें जितना कोयला पाउडर लिया गया होगा उसी के अनुसार टिकट पाउडर लेकर पानी के साथ आटा की तरह मनाते हैं
और छोटे-छोटे बांस की कंडोम को लगाकर भोला पाउडर और नरगिस पाउडर लगाकर  हाथ दिल लपेट कर तैयार करते हैं और इसे कोई पत्थर रखकर सुखाते हैं.



तैयार अगरबत्ती मार्केट में बेचने के लिए आवश्यकतानुसार अनेकों प्रकार के सुगंधित  सेंटेड का उपयोग करते हैं बाजार मे
सेंटेड अगरबत्ती के नाम से जाना जाता है अगरबत्ती को परसेंटेज करने के लिए VIP आई विल वाइट आयल का उपयोग
करते हैं क्योंकि इनका सुगंध अधिक समय तक टिकता है.



मार्केट

अगरबत्ती उद्योग  के बिक्री की स्पर्धा बाजार में ज्यादा है लेकिन इसमें खास बात यह है कि इसके ग्राहक भी बहुत ही ज्यादा
उपलब्ध है अगरबत्ती का ग्राहक हमेशा ही हर बार नए ब्रांड तथा सुगंधित अगरबत्ती को ढूंढता है.
इसी वजह से बाजार में नए ब्रांड आसानी से अपना प्रभुत्व स्थापित कर लेते हैं.



 रा मटेरियल्स



चिपकने वाला पाउडर, नरगिस  पाउडर, बांस की कच्ची डांडिया,  पानी, सुगंधित रस,, फूलों के रस, चंदन तेल, जिलेटिन
पेपर,  तथा अनेको प्रकार के रासायनिक द्रव्य कच्चे माल के रूप में प्रयोग की जाती है.



इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 300 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है इसमें से 200 स्क्वायर फीट की इमारत
होनी चाहिए इस व्यवसाय को सिर्फ दो मनुष्य बल के साथ शुरू किया जा सकता है जिसमें एक कुशल और अकुशल मनुष्य
बल की जरूरत होती है अगर यंत्र सामग्री की बात करें तो अगर आप छोटे स्तर पर शुरू करना चाहते हैं तो बिना यंत्र सामग्री के ही शुरू कर सकते हैं.

इस व्यवसाय में मासिक ₹20000 का कच्चा माल लगेगा,  अगर वार्षिक रूप से बात करें तो करीब ₹200000 का कच्चा
माल वार्षिक लगेगा जिससे 580000 रुपए की बिक्री होगी जिस में कुल खर्च 380060 होता है इस प्रकार से इस व्यवसाय
में ₹200000 वार्षिक कमा सकते हैं

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बॉल पेन उद्योग BALL PEN MANUFACTURING BUSINESS

आधुनिकीकरण के दौर में लोगों को शिक्षा का महत्व अच्छी तरह से समझ आया है लोगों को यह बात समझ आ गई है कि एक अच्छा जीवन जीने के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है,इसी कारण शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक की अभिभावक अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देना चाहते हैं.  ऐसी स्थिति में पेन हर घर की जरूरत है दैनिक जीवन में पेंट हर किसी को लगती है चाहे वह विद्यार्थी हो, अधिकारी हो, डॉक्टर हो, या फिर इंजीनियर इनके बिना इन किसी का महत्व नहीं है.


आज से करीब 25 साल पहले स्याही के पेन उपयोग में लाए जाते थे स्याही के पेन के लिए  स्याही की दवात , निपल और जीप इस्तेमाल में लाया जाता था लेकिन आज के दौर में उसकी जगह बाल पेन ने ले ली है
स्याही के पेन की स्याही खत्म होने पर उसमें से आई भरनी पड़ती थी शाही भरते समय आने दो बार चाय के दाग कागजातों पर और कपड़ों पर पढ़ते थे तथा पेन के जीप टूट जाते थे.
बालपेन आ जाने के कारण इन झंझटों से छुटकारा मिल गया,  इसका प्रयोग अत्यंत ही सुविधाजनक और आसान होने के कारण विद्यार्थी से लेकर शिक्षकों तक,  बैंकों, ऑफिस में सभी आज बाल पेन का उपयोग करते हैं.
यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसे आप अपनी क्षमता के अनुसार बढ़ा सकते हैं इसमें नुकसान का नामो निशान तक नहीं है.
बाजार में सस्ती और आकर्षक फैंसी बॉलपेन बनाइए और मार्केट में सप्लाई कीजिए,  बाजार के मांग के अनुसार अनेकों प्रकार की डिजाइन में यदि आप बॉल पेन का उत्पादन करते हैं तो आप जल्द ही एक बड़ा ब्रांड नेम तैयार कर सकते हैं.



मार्केट

बाल पेन उत्पात कितने  बड़े पैमाने पर कर रहे हैं   उसी के अनुसार अपना कार्य क्षेत्र से करना पड़ेगा,  शुरुआत में आप स्टेशनरी की दुकानों तथा होलसेल व्यापारियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार माल सप्लाई कर सकते हैं.



रा मटेरियल



इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए प्लास्टिक पाउडर नोजल,  स्याही, पाली प्रोविजन, प्लास्टिक के कवर इत्यादि कच्चे माल के रूप में लगेगा.



मशीनरी

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए लगने वाली मशीनरी में स्याही भरने की मशीन,  ओवन, बॉल पेन का हैंड मोल्डिंग मशीन, नोजल तैयार करने की मशीन और स्क्रीन प्रिंटिंग मशीन की आवश्यकता पड़ती है



इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 500 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 300 स्क्वायर फीट में इमारत होनी चाहिए इस व्यवसाय को कुल चार मनुष्य बल के साथ शुरू किया जा सकता है जिसमें से एक कुशल कारीगर होना चाहिए.
इस व्यवसाय में जगह के विकास के लिए ₹90000 तथा यंत्र सामग्री पर कुल ₹10000 खर्च होंगे,  इसमें मासिक कच्चा माल ₹100000 का लगेगा. इस प्रकार वार्षिक कच्चा माल कुल 1200000 वेतन लगेगा जिससे तैयार बालपेन की बिक्री 2800000 रुपए तक की होगी.

मनुष्य बल का वेतन कच्चा माल और अन्य खर्च कुल 2200000 रुपए तक का होगा,  इस प्रकार आप इस छोटे से उद्योग से ₹600000 वार्षिक फायदा कमा सकते हैं. इस व्यवसाय को शुरू करने पर बैंकों से  90% का कार्य मिलता है तथा आप को 10% अपने पास से लगाना होगा.

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मिक्सर निर्माण उद्योग Mixture Manufacturing Business



आधुनिकीकरण के इस दौर में घर, होटल,  भोजनालय, रेस्तरां में सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाने वाला उपकरण मिक्सर ही है. मिक्सर के बिना आज के दौर में होटल में भोजन तैयार करना अत्यंत कष्टकारी कार्य है.
मिक्सर बिजली से चलने वाला एक इलेक्ट्रिक उपकरण होता है  जिसके निर्माण में अत्यंत सतर्कता बरतनी पड़ती है मिक्सर का अधिकतम उपयोग महिलाएं करती है.  मिक्सर का उत्पाद SI प्रणाली के बात किया जाता है और इसकी मंजूरी लेनी पड़ती है.
बाजार में अनेकों कंपनियां है जो मिक्सर सप्लाई करती है उनकी बनावट एक जैसा ही है लेकिन कीमती अलग-अलग होती है ब्रांड के अनुसार.
अगर आप को इस उद्योग में आगे तक जाना है तो अच्छी गुणवत्ता वाली मिक्सर मशीनों का निर्माण कराएं.
मिक्सर प्यार करने के लिए प्लास्टिक की बाड़ी,  इलेक्ट्रिक मोटर, ब्लेड्स, अलग-अलग भाग लगते हैं.


रा मटेरियल


मिक्सर निर्माण उद्योग के लिए आराम मटेरियल से प्लास्टिक की मिक्सर बाड़ी,  एनिमल वायर, माइल्ड स्टील, ब्लेड, कार्बन computentor , स्टंपिंग सिलिकॉन सिट आज की जरूरत होती है.



मशीनरी

इस उद्योग को शुद्ध करने के लिए मशीनरी में  लेथ मशीन, ग्राइंडर, फील्ड वाइंडिंग मशीन, आर्मेचर वाइंडिंग मशीन,     आदि की जरूरत होती है/,



इस उद्योग को शुरू करने के लिए 5000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है जिसमें 3000 स्क्वायर फीट में इमारत होनी चाहिए अगर मनुष्य बल की बात करें तो कुल 25 मनुष्य बल की जरूरत होती है उसमें 15 मनुष्य बल कुशल कारीगर होने चाहिए.
इस व्यवसाय में मशीनरी पर खर्च करीब 1500000 रुपए तक का होता है तथा मासिक कच्चा माल ₹300000 तक का आता है इस प्रकार वार्षिक कच्चा माल ₹3600000 के लगेंगे जिसमें बनी सामग्री 9900000 रूपय में बिकेगी.
इस व्यवसाय में कुल वार्षिक खर्चा 7700000 रुपए का है इसमें कच्चा माल और मनुष्य बल का वेतन आदि संलग्न है.  इस व्यवसाय में वार्षिक 2200000 रुपए तक आसानी से फायदा कमा सकते हैं.

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पेंसिल और खड़िया निर्माण उद्योग pencil and chaak manufacturing

आजकल शिक्षा की शुरुआत सही अर्थ में पेंसिल से शुरू होती है और प्राथमिक स्कूलों में पुराने समय में बच्चों को शिक्षा शुरू होने से सर्वप्रथम पेंसिलऔर स्लेट दिए जाते थे.
पेंसिल का उपयोग तो आज अधिक बच्चे करते हैं लेकिन खड़िया  कब आज और इसी स्कूलों की ब्लैक बोर्ड पर लिखने के काम आते हैं’



यह एक ऐसा उद्योग है जिसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का थोड़ा सा भी प्रभाव नहीं पड़ता है आजकल हर क्लास के बच्चों को पेंसिल की जरूरत होती है जिसका उपयोग पुराने समय से होता आ रहा है.



पेंसिल और खड़िया निर्माण उद्योग इतना आसान है कि इसे आसानी से घर पर ही शुरू किया जा सकता है इस व्यवसाय को शुरू करें आप अपने परिवार के साथ पेंसिल और खड़िया निर्माण उद्योग शुरू कर सकते हैं.



चाइना क्ले मिट्टी को बारीक करके उसका पाउडर बनाया जाता है तथा चाइना के लिए के पाउडर में जरूरत के अनुसार पानी डालकर उसकी लुगदी तैयार की जाती है गर्म पानी में फार्मूले के अनुसार गोंद डालकर गोंद का पानी और लुगदी एक मिश्रण तैयार किया जाता है
तैयार किए गए लुगदी  को नरम होने तक एक मशीन के द्वारा उस पर प्रहार किया जाता है इसके बाद से  यह एक मशीन में डाल दिया जाता है जहां से दूसरी तरफ से पेंसिल निकलती है.



पेंसिल को तैयार करने का फार्मूला खड़िया निर्माण से थोड़ा अलग है  लेकिन माल तैयार करने की प्रक्रिया एक जैसी ही होती है.




मार्केट

आजकल पेंसिल हर घर की जरूरत है हर घर में दो चार बच्चे हैं जो स्कूल जाते हैं उन्हें पेंसिल की जरूरत पड़ती है पेंसिल स्टेशनरी की दुकान ,  किराना दुकान तथा टपारिया पर भी बेची जाती है.

घर की दुकानें रिटेल दुकानदार स्कूल महाविद्यालय कोचिंग क्लासेस इन स्थानों पर जाकर आप भेज सकते हैं.



रॉ मटेरियल

प्लास्टर ऑफ पेरिस,  चाइना क्ले, जिप्सम पत्थर, सिलिकेट, गोंद, सोडियम, शंख जीरा, बॉक्स,    चाक्स के लिए रंग, ग्रेफाइट पाउडर, वार्निश, आदि कच्चे माल के रूप में जरूरत होती है



मशीनरी

मिक्सिंग मशीन,  राउंडिंग मशीन, फिल्टर प्रेस,  ग्लोइंग मशीन, हाइड्रोलिक प्रेस,  मिक्सर, और बॉक्स की जरूरत होती है.



 इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 1000 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होती है जिसमें से  500 स्क्वायर फीट में इमारत होनी चाहिए इस कार्य को एक कुशल और एक और कुशल मनुष्य बल की सहायता से आसानी से शुरू कर सकते हैं अगर मशीनरी की बात करें तो 70000 में सारी मशीनरी आ जाएंगी कच्चा माल मासिक ₹40000 तक का लगेगा इस प्रकार से वार्षिक कच्चा माल 480000 रुपए कल लगेगा जिससे वार्षिक बिक्री  10 लाख ₹30000 तक की होगी.



तथा कुल वार्षिक खर्च 770000 रुपए तक होगी इसमें कच्चा माल और वेतन तथा अन्य सारे  खर्च है इस प्रकार से इस व्यवसाय से वार्षिक दो लाख ₹60000 तक का फायदा कमा सकते हैं.