CFL Bulb, Tube & Choks Business सीएफएल बल्ब, ट्यूब और चोक्स उद्योग

वर्तमान समय में सीएफएल बल्ब क्यूट और जोक्स हर एक घर की जरूरत बन गई है. पुराने समय में मिट्टी के तेल के दीए प्रकाश के लिए इस्तेमाल किए जाते थे लेकिन आजकल हर घर में बिजली तथा अनेकों विद्युत उपकरणों का उपयोग किया जाता है. आजकल बिजली सिर्फ प्रकाश के लिए ही नहीं उपयोग होता है बिजली से चलने वाली अनेकों उपकरण है.
बिजली मानव जीवन की एक जरूरत बन गई है इसके बिना दैनिक जीवन के बहुत से काम हम नहीं कर सकते.
21वी सदी में भी देश के अधिकतर हिस्से रात में अंधेरे में डूबे रहते हैं आज भी ग्रामीण भागों में पर्याप्त बिजली नहीं मिलती.
रात के अंधेरे को दूर करने के लिए तथा बिजली की बचत करने के लिए सीएफएल बल्ब और दीव का निर्माण हुआ.
कुछ वर्ष पहले हम जो बल्ब यूज़ करते थे उनमें बिजली की खपत ज्यादा होती थी जो कि  100 वाट, 60 वाट तथा 40 वाट के होते थे जिसके कारण बिजली के बिल ज्यादा आते थे तथा बिजली की खपत बहुत ही ज्यादा होती थी.
सीएफएल बल्ब के आने से बिजली की खपत कम हो गई तथा दूसरा लाबिया हुआ कि सीएफएल बल्ब जल्दी खराब नहीं होते तथा इसका उत्पादन करने वाली कंपनियां गारंटी भी देती है.
श्रीफल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कम वाट के सीएफएल भी ज़्यादा प्रकाश देते हैं तथा बिजली का भरपूर बचत करते हैं.
शायद यही वजह है कि आजकल सीएफएल बल्ब ट्यूब और सौंफ का उत्पादन बड़े मात्रा में किया जा रहा है तथा बाजार में इसकी ज्यादा मांग है.

सीएफएल बल्ब और ट्यूब हर घर की जरूरत है इसलिए इसकी मार्केट के लिए ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती है.
इसको हम इलेक्ट्रिक की दुकानें माल डिपार्टमेंट स्टोर्स तथा होलसेल व्यापारी को भी बेच सकते हैं

मशीनरी

सीएफएल बल्ब उद्योग के लिए हैंड hp मोटर हैंडप्रेस , 4 क्वाइल वाइंडिंग मशीन तथा डाइज आज की जरूरत होती है

कच्चा माल

सीएफएल तथा ट्यूब उद्योग के लिए मुख्य रूप से आयरन, सोल्डर पेस्ट कटर  पीसीबी बोर्ड वेल्डिंग वायर PVC होल्डर सीमेंट चिपको टेस्टिंग बोर्ड कंप्लीट टूलकिट कॉपर वायर एलुमिनियम वायर रिल स्टैंड तथा स्लीव एल्मुनियम कप की जरूरत होती है

इस कार्य को करने के लिए 400 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है तथा एक कुशल और एक अकुशल मनुष्य बल की जरूरत होती है
मशीन पर ₹45000 खर्च करने होंगे तथा कच्चे माल पर ₹300000 खर्च करने होंगे. इस व्यवसाय को शुरू करने पर आपको कुल लागत का 35% खुद लगाने होंगे तथा इस पर आप 65% बैंक से कर्ज ले सकते हैं. इस व्यवसाय को करके आप प्रतिवर्ष ₹300000 तक कमा सकते हैं.

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