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व्यवसाय के प्रकार एवं उनके चयन

1. गृहोपयोगी उद्योग

बेरोजगार युवकों एवं महिलाओं को अकेले के लिए या फिर अपने परिवार के लिए रोजगार के साधन के रूप में रोजगार मिले इसी उद्देश्य के साथ घरेलू उद्योग शुरू किए जाते हैं जिन्हें गृहोपयोगी उद्योग कहते हैं.
गृहोपयोगी उद्योग में कम लागत में ही अकेले परिवार को या फिर किसी समूह को रोजगार देने की क्षमता है.
गृह उद्योग में संभवता खाने पीने की पदार्थ तैयार करना तथा रोजमर्रा की जिंदगी में जरूरत के लिए लगने वाली सामग्री को नियमित करना है जिसका उद्योगों में समावेश होता है.
आजकल के समय में आधुनिकीकरण के कारण बड़ी-बड़ी कंपनियों के उनके उत्पादों में से छोटे-छोटे भाग भी घरेलू उद्योग करने वाले लोग ही तैयार कर रहे हैं. भारत जैसे जनसंख्या वाले विश्व में संभवता दैनिक उपयोग में आने वाली सामग्री पारंपरिक व्यवसाय और अन्य पदार्थों की निर्मिति ऐसे उद्योग व्यवसाय के लिए उपयोगी उद्योग में साधारण तौर पर चुने जाते हैं. इसमें सामान्यता मोमबत्ती उद्योग अगरबत्ती उद्योग बिंदिया तैयार करने का उद्योग पेंसिल चौक तैयार करना अच्छा तैयार करना पापड तयार करना तरह तरह के मसाले तैयार करना समोसे पानी पूरी मसाला तैयार करना शिव तैयार करना सेवैया तैयार करना किसी को ला तैयार करना पेपर सोडा तैयार करना कुमकुम तैयार करना दंतमंजन तैयार करना गुलकंद मसाला सॉन्ग तैयार करना तथा लकड़ी के खिलौने तैयार करना जैसे हस्तकला से तैयार की जाने वाली वस्तुएं आदि जैसे उद्योग धंधे आज भारत में गृहोपयोगी उद्योग के रूप में किए जाते हैं

2. लघु उद्योग

सामान्य रूप से कम पैसे और थोड़ी सी जगह पर शुरू हो जाने वाले उद्योग को लघु उद्योग कहते हैं आवश्यक मनुष्य बंद खुद ही प्रत्यक्ष उत्पादन के लिए सहयोग करने हेतु काम करना जिन लोगों के किस सामान का बाजार भाव स्थानीय स्तर पर अथवा लोकल मार्केट स्तर पर होता है ऐसे ही बहुत से उद्योग लघु उद्योग विभाग में आते हैं. लघु उद्योग में सामान्यता हैंगर तैयार करना बालपेन तैयार करना स्क्रीन प्रिंटिंग फिनाइल उद्योग शैंपू तैयार करना साबुन तैयार करना कपड़े धोने की पाउडर तैयार करना पॉलीथिन के थैले कपड़े की थैलियां पर तैयार करना खाद्य तेल उद्योग पशुखाद्य उद्योग प्लास्टिक की वस्तुएं तैयार करना ट्यूब लाइट चौक सीएफएल बल्ब तैयार करना लिक्विड सोप तैयार करना बॉक्स पैकिंग के उद्योग इत्र परफ्यूम शेयर करना रूम तैयार करना फेब्रिकेशन उद्योग गैस के उपकरण धातु की वस्तुएं रोलिंग शटर तैयार करना बर्तन बनाना साइकिल के पॉक्स आदि लघु उद्योग में आते हैं

3. अन्न प्रक्रिया उद्योग

मनुष्य की प्रतिदिन आहार में लेनेवाले अधिकतर पदार्थ में अनाज ही आते हैं भारतीय लोगों आहार पद्धति है वैसे प्रदेश के अनुसार एक निश्चित सीमा होती है लेकिन आजकल के समय में आधुनिकीकरण के कारण खाने-पीने की प्रक्रिया में अनेकों बदलाव आए हैं.
बिक्री और फास्ट फूड के पदार्थ जो देखने में सुंदर तो लगते ही हैं खाने में भी चटपटी होने के कारण घर के बच्चे ऐसे व्यंजनों की मांग करते हैं.
अन्न प्रक्रिया उद्योग में होटल ढाबा बेकरी चाइनीस चीजों के स्टाल फास्ट फूड की दुकानें इत्यादि आती है. बाजार की मांग और खाद्य पदार्थों की थोड़ी सी जानकारी का अध्ययन करके इन व्यवसाय में से कोई एक नया व्यवसाय चुनकर अपना कैरियर स्थापित कर सकते हैं.
अन्न प्रक्रिया उद्योग में काजू प्रक्रिया उद्योग उद्योग बेकरी व्यवसाय अचार उद्योग मसाले उद्योग गुलकंद व्यवसाय व्यापार व्यवसाय लॉलीपॉप चॉकलेट उद्योग कैंडी होटल व्यवसाय इत्यादि आते हैं.

4. आधुनिक उद्योग

समय के साथ हुए बदलाव के कारण जिन उद्योगों का निर्माण हुआ है उन्हें साधारण तौर पर आधुनिक उद्योग कहा जाता है जैसे-जैसे संसार का आधुनिकीकरण हुआ है कुछ उद्योग में मंदी आई है तथा कुछ नए उद्योग आए हैं.
इनमें मोबाइल के छोटे-बड़े पार्ट्स तैयार करना बाइक्स के स्पेयर पार्ट तैयार करना तथा कंपनियों के कुछ इस प्रेस के पास तैयार करने होते हैं स्टैंडर्ड स्टील के पीतल और एल्मुनियम के बर्तन तैयार करना क्लच वायर तैयार करना फ्यूज होल्डर्स केबल क्लिप्स मल्टी पिन कनेक्टर तैयार करना चार्जिंग की बैटरियां तैयार करना स्टूडियोज के लाइक स्टैंड TV के टेबल्स स्टैंड तथा बिजली से चलने वाली मोटर पंखे प्लास्टिक की वस्तुएं आधी है इनमें से हमें एक ही व्यवसाय चुनना है.

5. सेवा उद्योग

गांव का आधुनिकीकरण होने के साथ-साथ दैनिक जीवन में बहुत सारी चीजों की जरूरत पड़ती है हम देखते हैं कि बहुत सारी कंपनियां होती है संस्थाएं होती है जो गांव में भी सेवाएं प्रदान करती है जैसे कि ट्रेवल एजेंसी अगर हमें कोई गाड़ी किराए से चाहिए तो हम ट्रेवल्स एजेंसी को फोन करते हैं तथा हमें वह गाड़ी पर बैठ कर आते हैं या व्यवसाय भी गांव में बड़ी तेजी से पनपा है.
इसके साथ ड्राइविंग स्कूल मसाज सेंटर नौकरी के बारे में जानकारी वाले केंद्र साइबर कैफे कोचिंग क्लासेज फिटनेस सेंटर इंटीरियर डेकोरेशन प्रॉपर्टी सलाहकार तथा साउंड सिस्टम आदि है ऐसे उद्योग है जिनकी सेवा देकर हम उस व्यवसाय में अपना करियर बना सकते हैं.

6. खेती से संबंधित उद्योग

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कौन सा व्यवसाय ? Which Business ?

व्यवसाय में प्रमुख रूप से आधुनिक उद्योग सेवा उद्योग लघु उद्योग गृहोपयोगी उद्योग अन्न प्रक्रिया उद्योग खेती से संबंधित उद्योग आदि है.
व्यवसाय का चयन करते समय हम जहां पर रहते हैं वहां की पारिवारिक पार्श्वभूमी बौद्धिक क्षमता मेहनत करने की तैयारी आर्थिक क्षमता नफे-नुकसान को सहने की मानसिक तैयारी व्यवसाय के लिए आपके आसपास का वातावरण विकास की दृष्टि से भगवान की दृष्टि से उचित है क्या यह सब सोच समझकर विचार करके व्यवसाय का चयन करना चाहिए.
व्यवसाय शुरू करते समय सबसे महत्वपूर्ण और दीर्घकालीन परिणाम करने वाला निर्णय मतलब व्यवसाय का चयन व्यवसाय की शुरुआत करते वक्त के सिद्धांत की सामग्री संसाधन की जरूरत होती है वैसे ही कच्चे सामानों की भी जरूरत होती है.

उत्पादित व्यवसाय शुरू करना हो तो जो पालन शुरू करना है उसके लिए लगने वाले कच्चे सामग्री अपने पास उपलब्ध है या नहीं यह देखना है अगर नहीं है तो जहां उत्पादन शुरू करना है वहां से कितनी दूरी पर कच्ची सामग्री उपलब्ध है इसका आकलन करना है तथा वहां से उत्पादन लेने वाली जगह तक वह सामग्री लाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन में कितना खर्चा होता है वह खर्चा हमारे लिए उचित होगा या नहीं क्या वह खर्च करके हम उत्पादित सामान की कीमत अन्य प्रकार के उत्पादों से कंपटीशन करते वक्त हमें तालमेल रखना संभव है या नहीं इन सब पर ध्यान देना होगा.
हमें नया व्यवसाय शुरू करते वक्त कुछ जरूरी बातों पर ध्यान देना होगा व्यवसायों में से हम एक कर सकने वाले सफलता की निश्चित गारंटी देने वाले किसी भी एक विभाग का सिर्फ एक ही व्यवसाय चुने.
हमें जब भी व्यवसाय शुरू करना हो हमें उस समय सिर्फ एक ही विकल्प चुनना होगा और उस पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना होगा जिससे कि हम उसमें आगे बढ़ सके और यह हमारे व्यवसाय के लिए भी जरूरी होगा.
व्यवसाय में

1. आधुनिक उद्योग
2. गृहोपयोगी उद्योग
3. खेतीबाड़ी से संबंधित उद्योग
4. लघु उद्योग
5. सेवा उद्योग तथा
6. अन्न प्रक्रिया उद्योग है
इन सभी उद्योग में अनेकों प्रकार के व्यवसाय आते हैं इनमें से एक ही विकल्प चुनकर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहिए.

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व्यवसाय या नौकरी Business Or Job ?

 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर इंसान भौतिक सुख के पीछे लिखे हुए जमाने में अधिकतर लोग नौकरी को प्रधानता देते हैं लेकिन हम व्यवसाय करें या नौकरी इसके बारे में हमारे मन में जो संकल्प है उस संकल्प कि एक बार ही सही लेकिन जांच करनी चाहिए.
नौकरी में सामान्यतः 8 घंटे का काम होता है और प्रति महीना एक दीक्षित वेतन मिलता है इसमें नफे नुकसान की जिम्मेदारी नहीं रहती है. इसमें हमें कंपनी के नकली नुकसान से कुछ भी लेना देना नहीं होता है 8 घंटे ड्यूटी करने पर अपना काम पूरा हो जाता है जिससे कि महीने में एक निश्चित वेतन मिलता है और उस मिलने वाले वेतन से पारिवारिक खर्च पूरा होता है.
शायद इसीलिए आजकल की युवा व्यवसाय से ज्यादा नौकरी को प्रधानता दे रहे हैं हर कोई सोचता है कि जब नौकरी से हमारा जीवन अच्छी तरह चल रहा है तो फिर उद्योग व्यवसाय में जाकर धोखा क्यों खाएं यही भावना आजकल के युवाओं में है.

बच्ची से पढ़ाई करते हैं तो अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही सिखाते हैं कि उनसे पूछते हैं कि उन्हें बड़ा होकर क्या बनना है कौन सी नौकरी करनी है यही सोच समझकर अभिभावक अपने बच्चे को शिक्षा भी देते हैं उस क्षेत्र से संबंधित.
अधिकतर अभिभावक अपने इच्छाओं आकांक्षाओं को अपने बच्चों पर लगते हैं वह यह जानने की कोशिश नहीं करते कि उनकी रुचि क्या है उनकी क्षमता क्या है वह क्या करना चाहते हैं उन्हें क्या करना संभव है ?
उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद सबको अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी चाहिए होती है लेकिन इसमें कुछ ही लोग होते हैं जो जिस क्षेत्र की शिक्षा ले उसी क्षेत्र में प्रगति विकास करने की दृष्टि से नया कुछ तो करने के लक्ष्य से उस क्षेत्र में अनुसंधान अध्ययन कर के नए प्रयोग करना चाहते हैं और इस बात के लिए अभिभावकों का संभवता विरोध रहता है नौकरी को आज सामाजिक प्रतिष्ठा मिल चुकी है.
भावुक अपने बच्चों को यह उदाहरण देते हैं कि उनका बच्चा यह नौकरी करता है इतना वेतन पाता है.
लेकिन ऐसे उदाहरण देते वक्त हम धीरूभाई अंबानी किर्लोस्कर बजाज रतन टाटा बिरला लक्ष्मी निवास मित्तल जैसे उद्योगपतियों ने किस तरह उन्नति की उनके उदाहरण देना भूल जाते हैं उन्होंने कैसे खुद के विकास के साथ-साथ देश के विकास में अतुलनीय योगदान दिया उसे भी आजकल के युवाओं के सामने रखे जाने चाहिए जो कि सामान्य तौर पर रखा नहीं जाता.
हमें नौकरी या व्यवसाय में प्रवेश करने से पहले हमें इसका दृढ़ संकल्प करना चाहिए कि हम नौकरी करें या फिर व्यवसाय.
नौकरी करें या व्यवसाय इसका फैसला करें और फैसला होते ही तैयारी में लग जाए क्योंकि फैसला ना करना भी असफलता की एक निशानी है अपने आलस्य त्याग दें अपने समय का सदुपयोग करें अपने काम में लगे.
यदि आपने यह निर्णय लिया कि आपको व्यवसाय करना है तो कौन सा व्यवसाय करें इस का चयन करें क्योंकि जो व्यवसाय करेंगे उसकी सफलता और सफलता आपके करियर से संबंधित होने के कारण उसमें आपका कार्य हो जाएगा और आपको जो संभव है ऐसा व्यवसाय का चयन करें.

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CFL Bulb, Tube & Choks Business सीएफएल बल्ब, ट्यूब और चोक्स उद्योग

वर्तमान समय में सीएफएल बल्ब क्यूट और जोक्स हर एक घर की जरूरत बन गई है. पुराने समय में मिट्टी के तेल के दीए प्रकाश के लिए इस्तेमाल किए जाते थे लेकिन आजकल हर घर में बिजली तथा अनेकों विद्युत उपकरणों का उपयोग किया जाता है. आजकल बिजली सिर्फ प्रकाश के लिए ही नहीं उपयोग होता है बिजली से चलने वाली अनेकों उपकरण है.
बिजली मानव जीवन की एक जरूरत बन गई है इसके बिना दैनिक जीवन के बहुत से काम हम नहीं कर सकते.
21वी सदी में भी देश के अधिकतर हिस्से रात में अंधेरे में डूबे रहते हैं आज भी ग्रामीण भागों में पर्याप्त बिजली नहीं मिलती.
रात के अंधेरे को दूर करने के लिए तथा बिजली की बचत करने के लिए सीएफएल बल्ब और दीव का निर्माण हुआ.
कुछ वर्ष पहले हम जो बल्ब यूज़ करते थे उनमें बिजली की खपत ज्यादा होती थी जो कि  100 वाट, 60 वाट तथा 40 वाट के होते थे जिसके कारण बिजली के बिल ज्यादा आते थे तथा बिजली की खपत बहुत ही ज्यादा होती थी.
सीएफएल बल्ब के आने से बिजली की खपत कम हो गई तथा दूसरा लाबिया हुआ कि सीएफएल बल्ब जल्दी खराब नहीं होते तथा इसका उत्पादन करने वाली कंपनियां गारंटी भी देती है.
श्रीफल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें कम वाट के सीएफएल भी ज़्यादा प्रकाश देते हैं तथा बिजली का भरपूर बचत करते हैं.
शायद यही वजह है कि आजकल सीएफएल बल्ब ट्यूब और सौंफ का उत्पादन बड़े मात्रा में किया जा रहा है तथा बाजार में इसकी ज्यादा मांग है.

सीएफएल बल्ब और ट्यूब हर घर की जरूरत है इसलिए इसकी मार्केट के लिए ज्यादा मेहनत करनी नहीं पड़ती है.
इसको हम इलेक्ट्रिक की दुकानें माल डिपार्टमेंट स्टोर्स तथा होलसेल व्यापारी को भी बेच सकते हैं

मशीनरी

सीएफएल बल्ब उद्योग के लिए हैंड hp मोटर हैंडप्रेस , 4 क्वाइल वाइंडिंग मशीन तथा डाइज आज की जरूरत होती है

कच्चा माल

सीएफएल तथा ट्यूब उद्योग के लिए मुख्य रूप से आयरन, सोल्डर पेस्ट कटर  पीसीबी बोर्ड वेल्डिंग वायर PVC होल्डर सीमेंट चिपको टेस्टिंग बोर्ड कंप्लीट टूलकिट कॉपर वायर एलुमिनियम वायर रिल स्टैंड तथा स्लीव एल्मुनियम कप की जरूरत होती है

इस कार्य को करने के लिए 400 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है तथा एक कुशल और एक अकुशल मनुष्य बल की जरूरत होती है
मशीन पर ₹45000 खर्च करने होंगे तथा कच्चे माल पर ₹300000 खर्च करने होंगे. इस व्यवसाय को शुरू करने पर आपको कुल लागत का 35% खुद लगाने होंगे तथा इस पर आप 65% बैंक से कर्ज ले सकते हैं. इस व्यवसाय को करके आप प्रतिवर्ष ₹300000 तक कमा सकते हैं.

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Mineral Water, Drinking Water Business मिनरल वाटर/ ड्रिंकिंग वाटर उद्योग

कहा जाता है कि जल ही जीवन है तथा जल के बिना मनुष्य रह ही नहीं सकता जब भी हम घर से बाहर निकलते हैं तो रास्ते में कहीं न कहीं हम पानी की बोतल खरीद लेते हैं या फिर किसी न किसी कारणवश हमें पानी की बोतल खरीदनी पड़ती.
जब भी हम सफर कर रहे होते हैं तो रेलवे स्टेशन बस स्टेशन आदि जगहों पर जब भी हमें प्यास लगती है तो हम पानी की बोतल खरीद लेते हैं जोकि बाजार में 15 से ₹20 में मिलती है.
जैसे ऐसे समाज का आधुनिकीकरण हो रहा है लोगों की सुविधा के अनुसार उन्हें सामग्री मुहैया कराई जा रही है शायद यही सोच कर बिसलरी बनाने वाली कंपनी का भी निर्माण हुआ लेकिन उस वक्त उनके व्यवसाइयों ने उन्हें मुर्ख बताया था.
शुद्ध जल टीना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है अधिकतर बीमारियां दूषित जल के कारण ही हो रही है आज लोगों को जल कि शुद्धता और स्वच्छता की जरूरत समझ में आ गई है.
इसीलिए मिनरल वाटर व्यवसाय आजकल सबसे ज्यादा चलन में है.
शुद्ध जल के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड बी आई एस ने एक स्टैंडर्ड तैयार किया है जिसके अनुसार ही व्यापारी पानी का उत्पादन करता है. पेंट ड्रिंकिंग वाटर में मानव शरीर को हानि पहुंचाने वाले सभी प्रकार के क्षार कम किए जाते हैं.
इसके लिए सामान्यता जमीन के अंदर के पानी का ही उपयोग किया जाता है जिन्हें प्लास्टिक के बोतलों में पैक किया जाता है लेकिन यह पानी बोतल में पैक होने के दौरान कई प्रक्रियाओं से गुजरती है जैसे कि फिल्ट्रेशन और दिस इन्फेक्शन प्रक्रिया है.

मशीनरी

इस व्यवसाय के लिए RO मतलब रिवर्स ऑस्मोसिस मशीन, कार्बन फिल्टर, सॉफ्टनर, पैकिंग करने वाली मशीन तथा सेंड फिल्टर और बोर में से पानी निकालने वाली समर्सिबल पंप और पानी के मोटर की जरूरत होती है.

रा मटेरियल

रा मटेरियल में प्रमुख रुप से पानी और प्लास्टिक की बोतलें स्टीकर्स और कैन की जरूरत होती है.

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 4000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है तथा चार कुशल और चार अर्ध कुशल के अलावा 10 और कुशल मनुष्य बल की जरूरत पड़ती है.
अगर मशीन की बात करें तो मशीन की कीमत 4500000 रुपए है कच्चे माल पर 1500000 रुपए  का खर्च है.
इसमें भी 35% खुद खर्च करने होंगे तथा 65% बैंक से कर्ज मिल सकता है.
इस व्यवसाय में कुल वार्षिक खर्च 4643000 रुपए के होंगे तथा वार्षिक बिक्री 6463000 देंगे.
जिसमें वार्षिक फायदा 1820000 रुपए है

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Start Plywood Business प्लाईवुड उद्योग

Plywood Business

संपूर्ण संसार में लकड़ी को पर्याय रूप में ही प्लाईवुड का उपयोग हो रहा है पुराने समय में प्लाईवुड का उपयोग पैकिंग के काम के लिए होता था लेकिन आजकल दैनिक जीवन की जरूरतों में प्लाईवुड का उपयोग बहुत ज्यादा है.
लकड़ी से तैयार फर्नीचर महंगी होने के कारण तथा वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध के कारण प्लाईवुड उद्योग तेजी से उभरा है तथा लकड़ी की अपेक्षा यह काफी सस्ता है.
वर्तमान समय में प्लाईवुड की मांग इतनी ज्यादा है कि इस को पूरा करने के लिए दूसरे देशों से हमें प्लाईवुड का आयात करना पड़ता है जबकि भारत के पश्चिम बंगाल, केरल कर्नाटक और अंडमान निकोबार आदि राज्यों में प्लाईवुड का उत्पादन भी होता है विकसित देशों की अपेक्षा भारत में प्लाईवुड का उपयोग तथा उत्पादन कमी है जब से सरकार ने प्लाईवुड उद्योग को संरक्षण देना शुरू कर दिया तब से हर दिन नए-नए प्रकार के प्लाईवुड बाजार में आ रहे हैं.
आजकल औद्योगिक क्षेत्रों में प्लाईवुड की मांग बहुत ज्यादा है.
प्लाईवुड की सीट्स वजन में काफी हल्की होती है तथा यह जगह भी कम लेती है जिससे इसका यातायात काफी सस्ता है उत्पादन और अन्य खर्च भी लकड़ी की अपेक्षा काफी कम है तथा प्लाईवुड से तैयार हुई वस्तुएं फर्नीचर जल्दी खराब भी नहीं होते इसीलिए लोगों का झुकाव प्लाईवुड के प्रति ज्यादा ही है क्लाउड की खास बात यह है कि इसमें दिमाग भी नहीं लगता.

आजकल घर के टेबल , दीवान बेड, अलमारियां तथा कुर्सियां साथी साथ कार्यालयों में लगने वाले फर्नीचर भी प्लाईवुड से ही तैयार किए जा रहे हैं.

Plywood Business
Plywood Business

मशीनरी Plywood Business Machinary

ट्रिमिंग और चार्जिंग मशीन, आरा मशीन, डेलाइट प्रेस, पीलिंग मशीन, हैवी ऑटोमेटिक क्लिपर, बॉयलर , रोटर कट मिलर ,
सीजनिंग भट्टी,  हीटिंग सिस्टम और डबल ड्रम सेंटर आदि मशीनरी की जरूरत होती है.

फर्नीचर की दुकानों तथा हार्डवेयर की दुकानों में प्लाईवुड ज्यादा बिकता है आजकल घर के दरवाजे खिड़कियां तैयार करने वाले मिस्त्री हार्डवेयर की दुकान से ही प्लाईवुड खरीदते हैं इसलिए आप होलसेल में भी बेच सकते हैं.

Area Need For Plywood Business

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 10000 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होगी तथा 4 कुशल 4 कुशल के साथ 10 अकुशल मनुष्य बल की जरूरत भी होगी.
अगर मशीनरी की बात करें तो यह 65,000 में ही आ जाएगी लेकिन कच्चा माल 1 वर्ष के लिए 14400000 रुपए का पड़ेगा.
कुल वार्षिक बिक्री 27343402 का इसमें कुल वार्षिक खर्च 22075,000 रुपए होंगे.
जिस में कुल वार्षिक फायदा 5240000 रुपए का होगा.

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सौंदर्य प्रसाधन व्यवसाय Cosmetic Business

वर्तमान समय में पूरी दुनिया में हजारों करोड़ों रुपए का संदर्भ साधनों का व्यवसाय होता है खासकर भारत में सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई है भारतीय बाजार में नए उद्योगों को सौंदर्य प्रसाधन के उद्योग में अच्छा मौका है तथा इसकी मांग विदेशी बाजार में भी काफी अच्छी है.
कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियां बस्तियों से दूर होती है तथा स्वच्छ जगह पर होती है. यह उद्योग शुरू करने के लिए उत्पादक को डी फार्मेसी डिप्लोमा या रसायन शास्त्र में इंटर उत्तीर्ण होना चाहिए.
सौंदर्य प्रसाधनों में सैकड़ों उत्पाद आते हैं इसमें बेबी पाउडर बालों के तेल फेस पाउडर क्रीम बादाम तेल तिल का तेल टूथपेस्ट टूथ पाउडर कोल्ड क्रीम आंवला तेल नेलपॉलिश लिपस्टिक शैंपू बॉडी स्प्रे नहाने के साबुन तथा मेकअप के लिए लगने वाली सामग्री आते हैं.



मशीनरी

सौंदर्य प्रसाधन में आने वाले उत्पाद में जो भी उत्पाद शुरू करने है उसके लिए ऑटोमेटिक मशीन आती है

रा मटेरियल

सौंदर्य प्रसाधन में तय किए गए उत्पाद के अनुसार बाजार से कच्चा माल लेना होगा

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 10000 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है तथा कुशल अर्धकुशल के साथ कुल 14 मनुष्य बल की जरूरत होती है यंत्र सामग्री पर 1400000 रुपए खर्च होंगे तथा कच्चे माल पर वार्षिक 3600000 रुपए खर्च होंगे.
तैयार की गई सामग्री की वार्षिक बिक्री 943000 रुपए की होगी तथा कुल वार्षिक खर्च 652000 रुपए होंगे.

इस उद्योग में वार्षिक करीब 290000 रुपए का फायदा होगा.

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पत्रावली और पेपर डिश उद्योग Paper Dish Business

वैसे तो हमारे देश में प्राचीन काल से ही पलसो के पत्तों से पत्रावली और द्रोण तयार करने का व्यवसाय था लेकिन आधुनिकीकरण के साथ पेपर डिश ने इसकी जगह ले ली तथा पेड़ों के पत्तों से तैयार किए जाने वाले पत्रावली का व्यवसाय कम हो गया इसे भारतीय संस्कृति में सालों से खानपान के लिए उपयोग किया जाता था.
आज भी बड़े-बड़े धार्मिक कार्यक्रमों में शादी विवाह चुनाव तथा धार्मिक विधियों में इनका उपयोग किया जाता है.
पेपर डिश तथा द्रोण पत्रावली व्यवसाय आजकल काफी तेजी से चल रहा है.
वर्तमान समय में रोड़ा पत्रावली तथा पेपर डिश का उपयोग अधिक मात्रा में हो रहा है तथा इस व्यवसाय में काफी तेजी आई है.
द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका उपयोग करने के बाद इसे फेंक दी जाती है इसे धोने की जरूरत नहीं होती.

paper-dish-business
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मशीनरी

द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश उद्योग के लिए मुख्य रूप से हाइड्रोलिक मशीन की जरूरत होती है जिससे 1 दिन में कम से कम 10000 पत्रावली तैयार की जा सकती है.

रॉ मटेरियल

अनेकों प्रकार के वाटरप्रूफ कागज तथा जिन आकार में द्रोणा पत्रावली तथा पेपर डिश तैयार करना है उस आकार की डाई और मांग के अनुसार गोल्डन और सिल्वर प्लास्टिक कोटेड पेपर की जरूरत होती है.

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 300 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होती है तथा इस मशीन को चलाने के लिए एक कुशल और अकुशल मनुष्य बल की जरूरत होती है अगर यंत्र सामग्री की बात करें तो यह मशीन ₹45000 में आ जाता है जिसका कच्चा माल वार्षिक ₹500000 का होता है
इस व्यवसाय में भी 35% खुद खर्च करना होता है तथा 65% बैंक से कर्ज मिलता है इस व्यवसाय में कुल वार्षिक बिक्री 1127000 की होती है तथा कुल वार्षिक खर्च 7 लाख 48 हजार रुपए का होता है.
 तथा कुल वार्षिक फायदा 3 लाख  79 हजार रुपए का होता है.

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प्लास्टिक बोतलों का निर्माण Plastic Bottles Manufacturing

आज आधुनिकीकरण के दौर में प्लास्टिक से तैयार की गई बहुत सारी वस्तुएं दैनिक जीवन में उपयोग की जाती है औद्योगिक और अन्य क्षेत्रों में प्लास्टिक उत्पादों की याद बहुत भारी मात्रा में मांग है आजकल मेजर कुर्सियां फर्नीचर से लेकर किचन के बैठने तक का हर एक सामग्री प्लास्टिक से बनता है.
प्लास्टिक से बनी सामग्री हल्की होने के साथ-साथ सस्ती और देखने में आकर्षित दिखती है और लोगों को जल्दी पसंद आ जाती है.

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इसी प्लास्टिक उत्पादों में से एक उत्पादन है प्लास्टिक की बोतलें , वर्तमान समय में स्ट्रेच ब्लो मोल्डेड पद्धति से प्लास्टिक की बोतलें तैयार की जाती है.
आजकल खाद्य तेलों सौंदर्य-प्रसाधनों के साथ साथ शीत प्रयोग के लिए प्लास्टिक पैकिंग का बहुतायत मात्रा में प्रयोग किया जाता है.
प्लास्टिक बोतले के निर्माण में सबसे खास बात यह है कि यह रिसाइक्लिंग होकर नई बन जाती है इसलिए रा मटेरियल्स की कमी महसूस नहीं होती.

मशीनरी

इस उद्योग के लिए स्पोर्ट्स ब्लो मोल्डिंग मशीन, लिफ्टिंग मशीन, इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन, स्क्रैप कटर मशीन, एक्सट्यूजन मशीन और जल शीतलीकरण यंत्र की जरूरत होती है.

रॉ मटेरियल्स

राम मटेरियल्स में कच्ची प्लास्टिक, पॉलीमर्स, पीवीसी, पीईटी, रासायनिक रंग तथा पाली एथिलीन आदि की जरूरत होती है

इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए 3000 स्क्वायर फीट जमीन की जरूरत होती है तथा दो कुशल दो अर्धकुशल तथा 6 अकुशल मनुष्य बल के साथ हम इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं.
मशीनरी की बात करें तो मशीनरी में खर्च ₹500000 का है तथा कच्चे माल का वार्षिक खर्च 12 लाख रुपए है.
जिससे कि कुल वार्षिक लागत 2545000 रुपए होगी तथा वार्षिक बिक्री 3337000 रुपए होगी.
जिससे कि वार्षिक फायदा 790000 रुपए का होगा.
अगर आप इस व्यवसाय को शुरू करना चाहते हैं तो आपको बैंक द्वारा 65% कार्य मिल सकता है तथा इस व्यवसाय के लिए आपको अपने पास से 35% खर्च स्वयं करना होगा.

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Course

Jobs, Courses, Specialization, Scholarships, Fellowships

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Opportunities after finishing their M.Tech:

Career alternatives after the completion of M.Tech may be broadly divided into four components. The four classes are: 

  • Going for a analysis diploma equivalent to PhD
  • Doing Job proper after finishing M.Tech
  • Joining engineering faculty as a trainer
  • Start your personal group

PhD–Doctoral diploma after M.Tech

If you would like you to get into the instructing occupation or have the eagerness to work in Research & Development organizations, you need to do a PhD after M.Tech within the space of your curiosity. Now that you’ve determined to pursue PhD after M.Tech, your goal needs to be clear on instructing or analysis as your profession choice.

In order to advertise larger training in India, Government of India has granted R&D organizations and Central Universities like IITs and NITs. The job position in instructing occupation shouldn’t be doubt profitable but in addition difficult on the identical time. Depending upon the world of your curiosity and fervour, you need to select your profession after M.Tech.

Doing Job proper after finishing M.Tech

Seeing the development, chances are you’ll get the identical job profile after M.Tech as you’ve got after B.Tech. However, the job position and place will provide you with extra duties and the wage package deal may also be comparatively larger. Moreover, since you’ll have higher grasp over the technical issues and clearer thought course of for the assigned duties, it is possible for you to to finish all of the duties in a productive method.

After M.Tech, you may simply discover job in analysis and improvement organizations, manufacturing corporations and IT corporations as Project Manager, Research Associate and Senior Engineers.

Taking up a Job in Teaching Profession

Generally, a lot of the college students after finishing their M.Tech go for educational jobs. Today, the tutorial sector in India for larger research is rising quickly, which has created demand for lecturers and professors at deemed universities, academic institutes and schools.

In order to affix the instructing occupation after M.Tech, college students should have in mind the significance of communication and presentation abilities. These abilities are essential for turning into a trainer. Moreover, you need to have the eagerness for instructing and needs to be affected person and calm sufficient to take care of college students. In addition, it’s essential to construct the behavior of studying books and journals to maintain abreast with prevailing tendencies within the respective topic.

Start your personal group

Want to turn out to be an entrepreneur after doing M.Tech? That’s nice! A only a few M.Tech graduates aspire to begin their very own group. However, the excellent news is you’ll have sufficient help by way of funding and investments from enterprise capitalists on the premise of M.Tech Degree. If you’ve gotten the eagerness to work with dedication and have the intuition of a fearless particular person along-with the best enterprise sense, you’ll are certain to turn out to be a profitable entrepreneur. Good Luck!

Specialization in PhD

A PhD holder is at all times valued and revered. And, if in case you have thought to pursue doctoral examine after M.Tech, it can work wonders for you supplied you’re employed with ardour and dedication. The space of specialization in M.Tech will ultimately resolve the world of your examine in PhD. For occasion, if in case you have performed your M.Tech in Mechanical Engineering, your space of specialization in PhD might be associated to Mechanical Engineering. Nevertheless, the precise space of analysis might be lastly determined by the respective division of the institute committee relying upon the data base and aptitude of the scholars.

Now-a-days, inter-disciplinary strategy in PhD is gaining recognition. It implies that candidates can go for two PhD specializations, the place a couple of professional might be wanted for steerage.

Fellowships:

Reputed engineering institutes like NITs, IITs and IISC Bangalore have separate funding insurance policies for PhD college students. The fellowships vary between Rs.19,000 to Rs. 24,000 monthly. Usually, the time period for this might three years, which is extendable as per the necessities.

Scholarships:

Department of Information Technology, Department of Science and Technology, UGC, AICTE and CSIR supply Scholarships to PhD college students. There are separate scholarship schemes for ladies scientists as nicely.

Other than the aforementioned authorities establishments, personal corporations equivalent to Shell and Microsoft additionally present scholarship to PhD college students specializing in trade associated issues. In addition, many personal corporations additionally make investments and contribute for the enhancement of Research and Development actions within the nation. 

Students who’re wanting ahead to pursue PhD in India ought to maintain the next issues in thoughts:

  • Before selecting an establishment, college students should be certain that to test the establishment’s infrastructural services along-with different issues like situation of library, equipments, lab, and so on
  • The specialists should be chosen as per the world of specialization in PhD. Otherwise, there might be a disconnection between the PhD Student and the respective information.
  • A PhD programme is an open-ended program, and it’ll not be thought of full until college students do their analysis work correctly. Therefore, be certain that to take your analysis work severely from the very first yr of PhD

Pursuing PhD in overseas:

There is a vibrant prospect for college students who wish to pursue their PhD in overseas. Universities equivalent to Stanford, Pittsburg, Berkeley and Wisconsin are of excessive reputation, that are absolutely outfitted with all the fashionable services required to finish your PhD in a hassle-free method. In order to pursue PhD in overseas, college students should take TOEFL and GRE examinations. On the premise of scores you get you get in these exams, you’ll admission to prestigious worldwide schools.

Germany and Australia are additionally thought of among the many most popular locations to pursue PhD programmes. The tuition charge for pursuing PhD from European international locations is minimal; nonetheless, the price of dwelling can fall on the upper facet.

Don’t fall within the lure of spurious universities

It’s good that you’re planning to pursue your PhD from worldwide universities. However, watch out whereas selecting the establishment and double test its credibility and accreditation. Like AICTE in India, the accreditation course of in USA is maintained by ABET. Therefore, college students should test the ABET accreditation ranking of the respective college after which a choice accordingly.



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